तहज्जुद नमाज़ की अह्मिअत और तहज्जुद पड़ने का सही तरीका

नमाज़े तहज्जुद तमाम नफ्ल नामजो में अफ़्ज़लिअत का दर्जा रखती है. इसकी फ़ज़ीलत का ज़िक्र करते हुए अल्लाह के रसूल ﷺ इरशाद फरमाया की, ” मोमिन की बुजूर्गी कयामुल लैल में है, और इज्ज़त लोगों से इस्तेग्ना  में  है “. नमाज़े तहज्जुद में मदाव्मत अख्तियार करने से बंदा अपने रब की नजर में वह मक़ाम व मर्तबा हासिल… Read More »

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आओ नमाज़ के मसलें जानिए : और शेयर करिये.

जिन कामो या बातो से नमाज़ फासिद हो जाती है, उन्हें मुफ्सिद्दत-ये-नमाज़ कहा जाता है अगर ऐसी  गलती हो जाये तो नमाज़ दोबारा पढनी पड़ेगी, सजदे -ये-साहू करने से सही नही होगी| [1] नमाज में किसी तरह , बोलने, बात करने से नमाज फासिद हो जाती है, भुल से बोले या जान बुज कर। कम बोले ये जयादा,… Read More »

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