तहज्जुद नमाज़ की अह्मिअत और तहज्जुद पड़ने का सही तरीका

By | June 11, 2017
तहज्जुद नमाज़ की अह्मिअत और तहज्जुद पड़ने का सही तरीका

नमाज़े तहज्जुद तमाम नफ्ल नामजो में अफ़्ज़लिअत का दर्जा रखती है.
इसकी फ़ज़ीलत का ज़िक्र करते हुए अल्लाह के रसूल ﷺ इरशाद फरमाया की,
” मोमिन की बुजूर्गी कयामुल लैल में है, और इज्ज़त लोगों से इस्तेग्ना  में  है “.

नमाज़े तहज्जुद में मदाव्मत अख्तियार करने से बंदा अपने रब की नजर में वह मक़ाम व मर्तबा हासिल कर लेता है की की उसे इज्ज़त व वकार और शाने इस्तेगना नसीब होती है. जिसके सिले में दुनिया में उसे किसी के आगे दस्ते सवाल दराज़ करने की ज़रूरत नही पड़ती और उसकी पेशानी खुदा के सिवा किसी के आगे नही झुकती

रसूल अकरम ﷺ ने अपनी उम्मत के शब् ज़िन्दादर और नमाज़े तहज्जुद की खातिर क्यामुल्लैलइ करने वाले के बारे में इरशाद फरमाया  कि

मेरे उम्मत के बर्गुज़िदा अफराद वो हैं जो कुरान को अपने सीने में उठाए हुए हैं और शब् बेदारी करने वाले हैं  ”

रमजान मोबारक  के रातों में हुजुर  अकरम ﷺ   का ये मामुल था कि आप ﷺ नमाज़ ईशा और तरावीह अदा  करने के बाद सोने के लिए तशरीफ़ ले जेते फिर रात  के किसी हिस्से में नमाज़े तहज्जुद के लिए बेदार होते तो वित्र को शामिल करके   ग्यारह रकात   नमाज़ अदा करते |

नमाज़े तहज्जुद के लिए नमाज़े ईशा के बाद कुछ सोना शर्त और मसनून है यही अमल अफज़ल और मुस्तहब है जो सुन्नते सहाबा से साबित है बगैर नींद के नमाज़े तहज्जुद का अदा करना मकरूह है |

नमाज़े तहज्जुद के औकात 

नमाज़े तहज्जुद के लिए रात का कोई हिस्सा मखसूस और मोतय्यन्न नही है | नमाज़े ईशा के बाद नींद के लिए बिस्तर पर चले जाएँ ख्वाह वह पंद्रह मिनट के ही लिए क्यों न हो फिर आप उठ कर नमाज़े तहज्जुद अदा कर सकते हैं  ये ख्याल कि तहज्जुद सिर्फ रात के पिछले हिस्से में  अदा हो सकती है कोई हकीक़त नही रखती .

याद रहे नमाज़े  तहज्जुद का वक़्त फजर तक रहता है | अक्सर बुज़ुस्गाने दीन का ये मामुल था कि वह नमाज़े ईशा के बाद सोते और फिर निष्फ शब् के आखरी हिस्से में उठते थे  बाज़ बुजुर्गो का निष्फ शब्  के पहले हिस्से में तहज्जुद का मामुल रहा है |

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