इस्लाम में परदे की अहमियत : जानिए और लोगों को शेयर करें.

By | June 17, 2017
इस्लाम में परदे की अहमियत : जानिए और लोगों को शेयर करें.

औरतों के पर्दे की अहमियत: – अल्लाह पाक ने इंसानी फितरत के नकाजों के मुताबिक़ बद्कारी के दरवाजों को बंद करने के लिए औरतों को पर्दें में रखने का हुक्म दिया है. पर्दे के फर्ज़ियत और उसकी अहमियत कुरआन मजीद और हदीसों से साबित है. चुनांचे कुरआन मजीद में  अल्लाह पाक ने औरतों पर पर्दे फ़र्ज़ फरमाते हुए इरशाद फरमाया है की – तुम अपने – अपने घरों के अन्दर रहो .और बेपर्दे होकर बाहर न निकलो जिस तरह पहले ज़माने के दौरे जाहिलियत में औरतें बेपर्दें होकर बहार निकलकर घूमती  फिरती थी.

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हदीश शरीफ में है की रसूलुल्लाह सल्लल्लाहूताला अलैहिवसल्लम ने फरमाया है की औरत पर्दे में रहने की चीज है. जिस  वक़्त वह  बेपर्दा  होकर बहार निकलती है तो  सैतान उस को झाँक – झाँक कर देखता है . ( तिरमिज़ी – जिल्द- 1, सफा-140).

और एक हदीश में है की बनाओ सिंगार करके इतर – इतर कर चलने वाली औरतों की मिसाल उस तारीकी की है जिसमें बिल्कुल रोस्नी ही न हो. ( तिरमिज़ी – जिल्द- 1, सफा-139).

 

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